जागरणसंवाददाता,धनबाद:भारतकेस्वतंत्रतासंग्राममेंदर्जहरतारीखअपनेआपमेंऐतिहासिकहै,बावजूदकुछतारीखऐसीहोतीहैं,जोभुलाएनहींभूलती।इनकाएकअलगमहत्वहोताहै।आजहीकेदिन93वर्षपहलेयानीआठअप्रैल1929कोकुछऐसाहुआथा,जिससेक्रान्तिकोएकनईपरिभाषामिली।आजहीकेदिन29अप्रैलकोशहीद-ए-आजमभगतसिंहवबटुकेश्वरदत्तनेदुनियाकोदिखादियाथाकिक्रांतिकारी,देशकेहिंसकअपराधीनहीं,बल्किबाहरीब्रिटिशहुकूमतकोजगानेवालेआजादीकेदीवानेथे।ऐसेदीवानेजिनकेइसकदमनेभारतीयस्वतंत्रताकीनींवरखी।दोनोंक्रांतिकारियोंनेअंग्रेजीहुकूमतकोमात्रहिलाकरहीनहींरखदिया,हजारोंयुवाओंमेंआजादीकीअलखभीजगादीथी।

पीकेरायमेमोरियलकालेजकेप्रोफेसरहिमांशुशेखरचौधरीबतातेहैंकिइसकवायदकीखासबातयहथीकिभगतसिंहऔरबटुकेश्वरदत्तनेएकनहींदोबमफेंकेथे।इसदौरानउन्होंनेइसबातकाखासख्यालरखाकिकोईभीहताहतनहोऔरऐसाहुआभी।बमफेंकनेकेबाददोनोंनेवहांसेफरारहोनेकीबिलकुलकोशिशनहींकी।वहांअसेंबलीमेंपर्चेफेंककरलागातारआजादीकेनारेलगातेरहेऔरअपनीगिरफ्तारीदी।भगतसिंहसेजबअदालतमेंपूछागयाथाकिक्रांतिसेउनलोगोंकाक्यामतलबहै,तबइसप्रश्नकेउत्तरमेंउन्होंनेकहाथाकिक्रांतिकेलिएख़ूनीलड़ाइयांअनिवार्यनहींहैऔरनहीउसमेंव्यक्तिगतप्रतिहिंसाकेलिएकोईजगहहै।वहबमऔरपिस्तौलकासंप्रदायनहींहै।क्रांतिसेहमाराअभिप्रायहै-अन्यायपरआधारितमौजूदासमाज-व्यवस्थामेंअमूलपरिवर्तन।भगतसिंहकेयहीशब्दआगेचलकरदेशकीआजादीकेमूलवाहकबने।भगतसिंहलगभगसभीयुवाओंकेप्रेरणाहै।