कोलकाता,राज्यब्यूरो।बंगालमेंचौदहवींऔरसोलहवींशताब्दीकेबीचबनाएकमंदिरवर्तमानमेंसंरक्षणकीओरअग्रसरहै।पश्चिममेदिनीपुरकेनारायणगढ़मेंबेलदासेसटेदेउलीगांवमेंइसमंदिरकोयोगीमंदिरयायुगीदेउलकेनामसेजानाजाताहै।लेटराइटपत्थरकेमंदिरकीनिर्माणशैलीइसकीविशेषताहै।पुरातत्वसर्वेक्षणमध्ययुगकेअज्ञातमंदिरकलाकारोंकीइसएकअद्वितीयकलाकोसंरक्षितकरनेकेप्रयासमेंहै।कलकत्तासर्कलआफसर्वेकेप्रमुखशुभमजूमदारकेनेकहाकिहमारीटीमनेपिछलेमहीनेमंदिरकादौराकियाऔरजिलाधिकारीकोलिखेपत्रकेमहत्वकोमहसूसकिया।

कहाजाताहैकिएकयोगीएकदिनयहांसेकहींजारहाथा।रास्तेमेंवहगांवमेंरुकगया।वहयहींकहींतपस्यामेंबैठगया।उसकेबादआसपाससाधना-भजनकाजमावड़ाहोगया।उसकीमृत्युकेबादउसयोगीकीयादमेंमंदिरकानिर्माणकियागयाथा।उसकेबादकालांतरमंदिरजर्जरहोगया।कईलोगइसमंदिरकोनाथयोगीसमुदायसेजोडऩेकेइच्छुकभीहैं।यहनिश्चितरूपसेकहनासंभवनहींहैकियहमंदिरब्राह्मणवादीसंस्कृतिकाहैयाजैन।गुमनामयोगीकीयादमेंआजभीपौषसंक्रांतिमेंइसयुगीदेउलकेकिनारेएकबहुतबड़ामेलालगताहै।

कलकत्तागल्र्सकालेजमेंइतिहासकीशिक्षिकाशर्मिलासाहानेकहाकिओडिशामेंनागरमंदिरशैलीकेदोप्रकाररेखऔरपीढ़ाशैलीकेमंदिरदेखनेकोमिलतेहैं।वहांमूलदेउलरेखकेसामनेपीढ़ायाजगमोहनदेखाजासकताहै।कलाकेनियमोंकेअनुसारइसेअक्सरभद्रदेउलकहाजाताहै।बंगालमेंपीढ़ाबादमेंएकविशिष्टमंदिरशैलीकेरूपमेंउभराहै।इसशैलीमेंमंदिरकीछतनीचेसेऊपरतकपिरामिडकीतरहछोटीसीबनीहुईहै।इसमामूलीशैलीकेमंदिरपश्चिमबंगालमेंपश्चिममेदिनीपुर,पुरुलियाऔरबांकुड़ामेंसबसेअधिकपाएजातेहैं।युगीदेउलकीजमीनकाडिजाइनचौकोरहै।

यहदेखनेमेकलशकीतरहहै।निर्माणकीइसशैलीमेंबौद्धप्रभावहै,साथहीजैनऔरब्राह्मणवादीमंदिरशैलीकेसंकेतभीहैं।हालांकिमूलरूपसेउत्तरभारतीयमंदिरशैलीकेप्रभावमेंपैदाहुईइसशैलीकोधीरे-धीरेओडिशासेसटेदक्षिण-पश्चिमऔरपश्चिमबंगालकेस्थानीयकलाकारोंकेहाथोंमेंअपनीशैलीमिलगई।