सावनकाआजपहलासोमवारहै।शिवमंदिरोंमेंभक्तमहादेवकेदर्शनकेलिएपहुंचरहेहैं।पहलेसोमवारकेदिनभास्कर12ज्योतिर्लिंगोंमेंसेएकराजस्थानकेप्रसिद्धशिवमंदिरश्रीघुश्मेश्वरद्वादशवांज्याेतिर्लिंगशिवालयकेदर्शनकरारहाहै।यहांपरबाबाभोलेनाथरौद्ररूपमेंविराजमानहैं।खासबातयहहैकियहांपरशिवलिंग24घंटेमेंसे16घंटेपूरीतरहसेजलमग्नरहताहै।ज्योर्तिलिंगकोजलमग्नरखाजाताहैताकिरौद्ररूपमेंनरहकरयेशांतरूपमेंरहे।

घुश्मेश्वरज्योतिर्लिंगमहाराष्ट्रकेदौलताबादकेबेरूलठगांवकेपासहोनेकादावाहै।महाराष्ट्रकेविशेषज्ञोंकाकहनाकियहज्योतिर्लिंगअजंताएवंएलोराकीगुफाओंकेदेवगिरीकेसमीपतड़ागमेंहै।आजहमआपकोराजस्थानकेएकमात्रव12वेंज्योर्तिलिंगकीविशेषताकेबारेमेंबतातेहैं।

सावनकेपहलेसोमवारसेएकरातपहलेहीदैनिकभास्करकीटीमशिवाड़मेंपहुंची।मंदिरपूरीतरहरोशनीसेजगमगारहाथा।मंदिरमेंभव्यसजावटकीगईथी।काफीलोगदर्शनकेलिएपहुंचरहेथे।अंदरजातेहीबाबाभोलेनाथकेदर्शनकिए।जिसेरातकेसमयमेंजलमग्नरखागयाथा।जिसेखालीकररातकोदोबजेसेबाबाकाश्रृंगारकियागया।यहांकिसीकोजानेकीअनुमतिनहींहोतीहै।सुबह4बजेआरतीकेलिएकाफीलोगोंकीभीड़होचुकीथी।4बजतेहीबाबाकेपटखोलेगए।इसकेबादआरतीहुई।आठबजेतककाफीदूर-दूरसेलोगोंकेपहुंचनेकासिलसिलाचलतारहा।दूध,जलवबेलपत्रचढ़ाएजारहेथे।8बजेकेबादभोलेनाथजलमग्नहोगए।

भगवानशिवका'शांत'और'रौद्र'रूप

भगवानशिवकेद्वादशवेंज्योतिर्लिंगकानाम‘घुश्मेश्वर’है।इन्हें‘घृष्णेश्वर’और‘घुसृणेश्वर’केनामसेभीजानाजाताहै।जयपुरसेकरीब90किलोमीटरदूरसवाईमाधोपुरजिलेमेंशिवाड़मेंश्रीघुश्मेश्वरद्वादशवांज्योर्तिलिंगहै।मंदिरमहंतबाबूलालपाराशरनेबतायाकिश्रीघुश्मेश्वरद्वादशवांज्योर्तिलिंगोंमेंअंतिम12वेंज्योर्तिलिंगहोनेकेकारणइसमेंएकादशरूद्र,द्वादशज्योर्तिलिंग,तीनअग्नि(सूर्य,चंद्र,अग्नि)कातेजअंतिमज्योर्तिलिंगमेंसमावेशहोगयाहै।जैसेकिचंद्रमाकीकलाद्वितीयासेबढ़ते-बढ़तेपूर्णिमाकोपूर्णरूपेणप्रकाशितहोजातीहै।वैसेहीसोमनाथप्रथमज्योर्तिलिंगउग्ररूपमेंहै।जोबढ़तेहुएघुश्मेश्वरमेंअतिउग्ररूपमेंहै।चारोंओरजलकापरिभ्रमणनहींहोतोयहजलाकरभस्मकरदें।खासबातहैकियहांपरशिवशांतरूपमेंरहतेहैंतोजलहरीमेंजलभरारहताहै।जबरौद्ररूपमेंविराजतेहैंतोजलहरीमेंजलनहींठहरताहै।

भगवानशिवकाएकमात्रत्रिमूर्तिमंदिर,VIDEO:यहांअंकितहैमंदिरकीकुंडली,पांचवास्तुनियमोंकेसाथबनाहैयहमंदिरताकिनलगेकिसीकीनजर

शिवमहापुराणमेंघुश्मेश्वरज्योर्तिलिंगकावर्णन

श्रीघुश्मेश्वरद्वादशवांज्याेतिर्लिंगट्रस्टकेअध्यक्षप्रेमप्रकाशशर्मादावाकरतेहैंकिशिवमहापुराणमेंघुश्मेश्वरइसज्योतिर्लिंगकावर्णनहै।ज्योतिर्लिंग‘घुश्मेश’केसमीपएकसरोवरभीहै।इसेशिवालयकेनामसेजानाजाताहै।मंदिरजीर्णोद्धार18वींशताब्दीमेंइंदौरकीमहारानीपुण्यश्लोकादेवीअहिल्याबाईहोलकरनेकरवायाथा।राजस्थानकेशिवाड़मेंद्वादशवेंज्योतिर्लिंगकादावाकरनेवालोंकाकहनाहैप्रसिद्धज्योतिर्लिंग‘श्रीघुश्मेश्वर’ईसरदाकेपासशिवाड़मेंहै।उनकाकहनाहैकिशिवाड़प्राचीनकालमेंशिवालयनामसेजानाजाताथाजिसकाउल्लेखशिवपुराणमेंईश्वरद्वारकेनामसेहैं।

महंतबाबूलालपाराशरबतातेहैंकियहांदक्षिणदिशामेंस्थितिदेवपर्वतपरसुधर्मानामकएकविद्वानब्राह्मणअपनीपत्नीसुदेहाकेसाथरहताथा।दोनोंहीभगवानशिवकेपरमभक्तथे।कईवर्षोंकेबादभीउनकीकोईसंताननहींहुई।लोगोंकेतानेसुन-सुनकरसुदेहादुखीरहतीथी।अंतमेंसुदेहानेपतिकोमनाकरउसकाविवाहअपनीबहनघुश्मासेकरादिया।घुश्माभीशिवभगवानकीभक्तथीऔरभगवानशिवकीकृपासेउसेएकपुत्रकीप्राप्तिहुई।सुदेहानेअपनीबहनसेकिसीप्रकारकीईष्र्यानकरनेकावचनदियाथा,लेकिनऐसाहोनसका।

बतातेहैकिकुछवर्षबादसुदेहानेघुश्माकेसोतेहुएपुत्रकावधकरकेशवकोसमीपकेएकतालाबमेंफेंकदिया।सुबहहुईतोघरमेंकोहराममचगया,लेकिनव्याकुलहोतेहुएभीघुश्मानेशिवभक्तिनहींछोड़ी।वहउसीतालाबपरगईऔरसौशिवलिंगबनापूजाकरविसर्जनकिया।घुष्माकीभक्तिसेशिवप्रसन्नहुए।जैसेहीवहपूजाकरकेघरकीओरमुड़ीउसेपुत्रखड़ामिला।वहशिव-लीलासेबेबाकरहगईक्योंकिशिवप्रकटहोचुकेथे।अबवहत्रिशूलसेसुदेहाकावधकरनेचलेतोघुश्मानेशिवजीसेविनतीकरतेहुएबहनसुदेहाकाअपराधक्षमाकरनेकोकहा।घुश्मानेविनतीकीकियदिवहउसपरप्रसन्नहैंतोयहींनिवासकरें।तबसेघुश्मेशनामसेज्योतिर्लिंगकेरूपमेंवहींस्थापितहोगए।

महमूदगजनवीवअलाउद्धीनखिलजीकाभीहुआआक्रमण

यहांपरसंग्रहालयमेंखंडितमूर्तियोंकोभीरखागयाहै।ट्रस्टकाकहनाहैकि1023मेंमहमूदगजनवीकेसेनापतिमसूदनेमथुरासेसोमनाथजातेसमययहांपरआक्रामणकियाथा।राजाचंद्रसेनगौड़वउनकेपुत्रइंद्रसेनगौडऔरउनकेसेनापतिरेवतसिंहराठौड़युद्धकरतेहुएवीरगतिकोप्राप्तहुएथे।तबरानियोंनेयहांपरजौहरकियाथा।फिरमंडावरकेराजाशिववीरचौहाननेघुश्मेश्वरकेप्राचीनमंदिरकाजीर्णोद्धारकराया।इसकेबाद1301मेंखिलजीनेदोनंदीवशिखरखंडकोनष्टकरदिएथे।अलाउद्दीनखिलजीनेमंदिरकेपासहीएकमस्जिदभीबनवाईथी।जोकिआजभीमंदिरपरिसरमेंहीमौजूदहै।