सरोजबाला,दातारपुर

शिवालिकपर्वतमालाकेआंचलमेंहरीभरीवादियोंऔरजंगलकेबिल्कुलपासउभरताहुआधर्मस्थानहैदलवालीकामांदुर्गामंदिर।इसमंदिरकीबहुतमान्यताहै।श्रद्धालुयहांआतेहैंमन्नतेंमांगतेहैं,पूरीहोतेहीवाद्ययंत्रोंसहितकृतज्ञताप्रकटकरतेहुएध्वजारोहणकरतेहैं।चाहेयहमंदिरकुल27सालपुरानाहैलेकिनइसकीप्रसिद्धिबड़ीतेजीसेहुईहै।यहांवासंतिकऔरशारदीयनवरात्रमेंबड़ीतादादमेंलोगजुटतेहैं।

हरसालपहलीजूनकोयहांवार्षिकोत्सवमनायाजाताहै।माताज्वालाजीसेपवित्रज्योतिलाईजातीहै।फिरजागरण,सत्संगऔरभंडारालगताहै,सुबहशामआरतीहोतीहै।

यहपवित्रस्थानदातारपुरसेदोकिलोमीटर,तलवाड़ासे12किलोमीटरऔरहाजीपुरसे11किमीदूरहै।बसऔरअपनेवाहनद्वारापहुंचाजासकताहै।

मंदिरकेसंस्थापकआध्यात्मिकविभूतिराजिद्रसिंहउर्फजिदाबाबादलवालीकेठाकुरहरनामसिंहकेछहपुत्रोंमेंसेएकहैं।48वर्षीयजिदाबाबाकीबाल्यकालसेहीजगजननीकेचरणोंसेकुछऐसीलग्नलगीकिरमगएमांकेभजनमेंऔरसभीप्रकारकामोहछोड़करअविवाहितरहेऔरछोटासामंदिरबनाकरहरसमयमांकीहीस्तुतिऔरपरोपकारकोअपनेजीवनकालक्ष्यबनालिया।परिसरमेंगुफाभीहैजोदर्शनीयहै।मांकीभव्यमूर्तिबरबसहीमनमोहलेतीहै।पासहीविशालएवंसुरम्यतालाबहै,जिसकानामहै,ताजखांकातालाबजोपर्यावरणसंरक्ष्णएवंजलसंरक्ष्णकाजीवंतउदाहरणहै।इसकेचारोंऔरबड़ेबड़ेपीपल,बरगद,आमआदिकेपेड़हैं,जोवातावरणकोशांतशुद्धतथापावनबनातेहैं।

-------------------तैयारियांवैसेतोहररोजनियमसेसुबहशामपूजन,आरतीकीप्रक्रियाहोतीहै।नवरात्रमेंसालमेंदोबारयहांविशेषआयोजनहोताहै।व्रतरखनेवालेश्रद्धालुओंकेलिएफलाहार,प्रसादकीव्यवस्थारहतीहै।कीर्तनसत्संगलगातारहोताहै।जिदाबाबाबतातेहैंआरतीमेंकाफीश्रद्धालुभक्तिभावसेमांभगवतीकीस्तुतिकरतेहैंऔरउनपरमांकीकृपाभीबरसतीहै।नवरात्रमेंलोगयहांलालचुनरी,नारियल,धूप,दीप,नैवेद्यतथाहलवाआदिसेपूजनकरतेहैं।

खासियतयहांथोड़ेहीसमयमेंतलवाड़ा,मुकेरियां,हिमाचल,जम्मूतथाअन्यशहरोंसेअसंख्यश्रद्धालुआनाशुरूहुएहैं।नतीजतनउनलोगोंकेसहयोगसेअबमंदिरकाआकारबड़ाभव्यएवंविशालहुआहै।अभीऊपरकीमंजिलकाभीखाकातैयारहैजिससेइसस्थानकीमान्यताऔरविस्तृतहोगी।

-------------------एकजूनकोभंडाराराजिद्रसिंह(जिदाबाबा)कीअध्यक्षतामेंयहांइसवर्षभी28वांविशालभगवतीजागरण,सत्संग,हवनयज्ञतथाविशालभंडाराएकजूनकोमनायाजाएगा।

नवरात्रमेंअष्टमीकोविशेषकन्यापूजाहोतीहै।भक्तोंकोकहाजाताहै,कन्याकोपूजतेहोतोकन्याभ्रूणहत्याजैसेमहापापसेबचोतभीहोगीमहामाईकीअनंतकृपाऔरसुखकीप्राप्ति।

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