करहल(मैनपुरी),संवादसूत्र।कस्बाकीएकपुरानीहवेलीसेखोदाईमेंतीर्थकरभगवानमहावीरकीसातइंचकीमूर्तिमिलीहै।मूर्तिकोधार्मिकअनुष्ठानशांतिधारासेपवित्रकरनेकेबादनसियामंदिरमेंरखागयाहै।जैनसमाजकेलोगइसे200सालपुरानीमूर्तिबतारहेहैं,हालांकिइसकीकोईपुष्टिनहींहुईहै।

कस्बानिवासीअवधेशकुमारदुबेकेपूर्वजजमींदारथे।दावाहैकिउन्हेंपुरानीहवेलीमेंएकजगहभगवानमहावीरकीमूर्तिजमीनकेअंदरहोनेकेसपनेआरहेथे।इसीआधारपरगुरुवारतड़केजैनसमाजकेयुवाओंनेपीलेकपड़ेपहनकरखोदाईशुरूकी।सुबहकरीब10बजेछहफीटकीगहराईपरभगवानमहावीरकीसातइंचकीमूर्तिमिली।यहदेखभीड़नेजयकारेलगानाशुरूकरदिया।अवधेशदुबेमूर्तिकोसम्मानकेसाथसिरपररखकरनसियामंदिरतकलेगए।यहांमूर्तिकोजिनेंद्रअभिषेकशांतिधारासेपवित्रकियागया।जैनसमाजकेलोगोंनेबतायाकिशुक्रवारकोकस्बेकेअन्यजैनमंदिरोंमेंमूर्तिकोलेजायाजाएगा।उसकेबादविधिविधानकेसाथमूर्तिकोमंदिरमेंस्थापितकियाजाएगा।एसडीएमकरहलरतनवर्मानेबतायाकिमामलेकीजानकारीनहींमिलीहै।-10सालपहलेनिकलीथीनेमीनाथकीमूर्ति

10सालपहलेजैनमुनिआचार्यविवेकसागरमहाराजचतुर्मासव्यतीतकरनेकरहलआएथे।उन्होंनेभीनसियामंदिरपरिसरमेंमूर्तिमौजूदहोनेकासपनाआनेकादावाकिया।खोदाईहुईतोभगवाननेमीनाथकीमूर्ति10फीटकीगहराईमेंथी।इसदौरानतांबेकेलोटेमेंकुछमोतीभीमिलेथे।इसमूर्तिकोपवित्रकरनेकेबादमंदिरमेंस्थापितकरदियागयाथा।