नाहन,राजनपुंडीर।देवभूमिहिमाचलमेंदेवीदेवताश्रद्धालुओंकीअलगअलगरूपमेंआस्थाकाकेंद्रहैं।ऐसाहीएकपवित्रस्थानभुरेश्वरमहादेवकाहै।जहांपरस्वंयभूशिवलिंगकीउत्पत्तिकालांतरसेमानीजातीहै।विश्वनाथवकेदारनाथद्वादशज्योतिर्लिंगोंवभूलिंगोंकेइतिहासमेंयहांस्थितस्वंयम्भूलिंगकालांतरमेंभूरीश्रृंग,जोदुग्धाहारीभुरेश्वरकेनामसेविख्यातहुआ,वहआजभीशिवलिंगशिलाकेरूपमेंविराजमानहै।

नाहन-शिमलाराष्ट्रीयराजमार्गपरजिलासिरमौरकेपच्छादउपमंडलकेसराहांकस्बेसेमात्र12किलोमीटरदूरपर्वतशिखरपरसमुद्रतलकेकरीब6800फुटऊंचाईपरस्थितहै,भूरेश्वरमहादेव(भूर्शिंगदेवता)काप्राचीनशिवमंदिर।मंदिरकेचारोंओरमनोहरदृश्यदेखतेहीबनताहै।स्थानीयग्रंथों,सहित्यकारोंवइतिहासकारोंसेप्राप्तजानकारीकेअनुसारद्वापरयुगमेंइसपर्वतशिखरपरबैठकरभगवानशिववमांपार्वतीनेकुरूक्षेत्रकेमैदानमेंकौरवोंवपांडवोंद्वारालडागयामहाभारतकायुद्धदेखाथा।

तभीसेयहांपरस्वयंभूशिवलिंगकीउत्पत्तिमानीजातीहै।भूरेश्वरमहादेवकीयहपर्वतश्रृंखलादेवदार,कायल,बान,चीड़,बुरासऔरकाफलकेपेड़ोंसेलबरेजहैं,जोयहांआनेवालेपर्यटकोंऔरश्रद्धालुओंकोअपनीओरअनायासहीआकर्षितकरतीहैं।इसपर्वतश्रृंखलासेचंडीगढ़,पंचकुला,मोहली,सोलन,कसौली,शिमला,चूड़धारवहरियाणाकेमोरनीहिल्सकाअदभुतनजारादेखपर्यटकबारबारयहांस्वयंहीखीचेचलेआतेहै।क्वागधारस्थितभूरेश्वरमहादेवमंदिरमेंपूरेवर्षश्रद्धालुओंवपर्यटकोंकातांतालगारहताहै।यहमंदिरपच्छादक्षेत्रकेलोगोंकुलदेवताभीहै।

भूरेश्वरमहादेवमेंहैस्वयंभूशिवलिंग

भूरेश्वरमहादेवकीदेवपरंपराभीएकदमनिरालीहै,गोपनीयशाबरीमंत्रवपारंपरिकधूपदीपसेपूजाकेचलतेदेवतारात्रिकेघुपअंधेरेवकंपकपातीठंडकेबीचएकविचित्रचमत्कारकरतेहैं।देवताएकऐसीशिलापरनकेवलछलांगलगातेहैं,बल्किकरवटेंभीबदलतेहैं।जोपहाड़मेंतिरछीलटकीहै।यहस्थानइतनाखतरनाकवविकटहैकियदियहांसेकोईवस्तुगिरजातीहै,तोहजारोंमीटरखाईमेंपहुंचजाएगी।

हरवर्षदीपावलीकेबादग्यासकोयहांदेवउत्सवमनायाजाताहै।हजारोंश्रद्धालुअपनेआराध्यदेवकेदर्शनार्थमंदिरमेंपहुंचतेहैं,जोकच्चादूधचढ़ाकरउन्हेंप्रसन्नकरतेहैं।भुरेश्वरमहादेवकादेवउत्सवदीपावलीकेसाथहीशुरूहोजाताहै।देवकारकेतहतजगहजगहजागरणवकरियाला,जबकिदशमीवग्यासकोमन्दिरमेंमेलेकाआयोजनकियाजाताहै।

महाराजासिरमौरकोयहींसेमिलाथासंतानप्राप्तिकावरदान

महाराजासिरमौरकोभीयहांसेसंतानरूपीरत्नकीप्राप्तिहुईथी।मान्यताहैकि16वींसदीकेआसपासजबमहाराजसिरमौरयहांसेगुजररहेथे।तोउन्हेंस्थानीयलोगोंसेइसमंदिरकेबारेमेंपताचला।इसपवित्रस्थानकीमहत्ताकाज्ञानहोनेपरउन्होंनेमहादेवसेसन्तानप्राप्तिकीकामनाकरली।बतातेहैंकिजल्दहीउनकीयहकामनापूर्णहोगई।उसकेबादमहाराजमंदिरपहुंचे,तोमंदिरकीविकटस्थितकोदेखतेहुएउन्होंनेपुजारीकोमोहतमिमयानीइसदेवस्थलीकाप्रबंधकबनादिया।साथहीवेतनस्वरूपकुछधनराशिभीनिर्धारितकरदी।इसकेबादपुजारीकोसालाना12सिक्केचांदीकेमिलनेलगगए।उन्हेंपुश्तेनीमाफिदारपुजारीकेपट्टेसेसम्मानितकियागया।आजभीउन्हेंराजस्वविभागद्वारा12रुपयेकीराशिप्रदानकरताहै।जिसकाराजरूवविभागमेंबाकायदाइंतकालदर्जहोताहै।

भूरेश्वरमहादेवपालकीमेंनहीं-एककोसचढ़ाईचढक़रपैदलपहुंचतेहैंमंदिर

क्वागधारकेभुरेश्वरमहादेवमंदिरमेंदेवग्यासकोहोनेवालादेवउत्सवअपनेआपमेंगहराइतिहाससमेटेहुएहै।यहांहोनेवालीदेवपरंपराएंअलगतोहैंही,साथहीवेकिसीचमत्कारसेकमभीनहींहैं।यहांकीविशेषतायहहैकिदेवतापालकीमेंनहींचलते,बल्किसीधेदेवशक्तिपुजारीमेंप्रवेशकरतीहैओरवहअपनेपारंपरिकश्रृंगारसेसुसज्जितहोकरसाक्षातदेवतारूपमेंपैदलमन्दिरपहुंचतेहैं।यहदेवयात्राअढ़ाईकिलोमीटरयानीएककोसचढ़ाईकासफरकरमन्दिर(मोड़)मेंपूरीहोतीहै।स्वयंभूशिवलिंगसेसुसज्जितइसमंदिरकेइतिहासकोलेकरअलगअलगधारणाहै।

16वींव17वींशताब्दीसेइसकाउल्लेखअवश्यहै।इसकीअपनीदेवपरंपराएंहैं,जोग्यासपर्वपरदेखनेकोमिलतीहैं।देवताकेश्रृंगारवसाजसज्जाकाभीअपनाअलगहीमहत्वहै।देवस्थलीपूजारली(पजेली)मेंदेवताकाश्रृंगारकरअपनाविशेषबाणा(पारंपरिकपौशाक)धारणकरतेहैं।इसदौरनउन्हेंवहपगडीपहनाईजातीहै,जिसमेंदेवताकाछत्रजड़ाहोताहै।इसछत्रकोमंदिरयामोड़परपहुंचकरपगड़ीसेउतारनेकेसाथहीस्वयंभूशिवलिंग-पिंडीपरसजादियाजाताहै।ग्यासपर्वपरहोनेवालेइसविशेषदेवउत्सवमेंशामिलहोनेकेलिएदूरदूरसेश्रद्धालुयहांपहुंचतेहैं।

देवतावाद्ययंत्रोंकीधुनोंकेबीचएककोसकीचढ़ाईचढ़तेहुए7चिन्हितस्थानोंपरदूधकीधारचढ़ातेहैंऔरमोड़मेंपहुंचतेही8वींधारशिलापरचढ़ातेहैं।इसकेबादहीदेवतामन्दिरमेंप्रवेशकरतेहै।जहांएकविशेषपरंपराकेअनुसार22उपगौत्रोंद्वाराआगेकीरस्मेंशुरूहोतीहैं।मन्दिरमेंदेवताकीपगड़ीकेअंदरजडेछत्रकोशिवलिंग-पिंडीपरसजादियाजाताहै।मुख्यकारदारपोलियाइनरस्मोंकोपूराकरवातेहैं।जिसमेंचांवरथीयाउपगौत्र-खेलकेकारदारदेवताकोशक्तिपरीक्षणकेलिएजलतीहुईबत्तीदेतेहैं,जिसेदेवतामुंहमेंलेतेहैं।कारदारअपनेकुलदेवताकेऊपरचांवरझुलाताहै,इसीलिएइनकीउपगौत्रकानामचांवरथियापड़ा।

क्ववागधारपर्वतश्रृंखलापरहैभाई-बहनकेप्रेमकीअनूठीगाथा

पच्छादक्षेत्रमेंप्रचलितकथाकेअनुसारकोपजेरलीगांवकेभाईबहनपशुचरानेक्ववागधारपर्वतश्रृंखलापरआतेथे।जोअनजानेमेंस्वयंभूशिवलिंगकेचारोंतरफ घूमतेथे।एकदिनभारीतूफान,वर्षा,ओलावृष्टिऔरबर्फबारीमेंपशुचरातेसमयउनकाएकबछड़ागुमहोगया।जबवहघरपहुंचे,तोसौतेलीमांनेदोनोंभाईबहनसेपूछाबछड़ाकहांपरहै।दोनोंभाईबहननेबतायाकिबछड़ागुमहोगयाहै,तोसौतेलीमांनेकड़ाकेकीठंडमेंदोनोकोबछड़ेकोखोजकेलिएक्वागधारपर्वतशिखरपरभेजदिया।

पर्वतशिखरपरशिवलिंगकेपासबछड़ापानेपरभाईनेबहनकोघरभेजदिया।दूसरेदिनप्रात:जबपिताऔरबेटीबछड़ेऔरपुत्रकीखोजमेंशिखरपरपहुंचे।तोशिवलिंगकेपासबछड़ेऔरलडक़ेकोनिश्चलपाया,जोदेखतेहीदेखतेदिव्यशक्तिमेंअंतध्र्यानहोगया।वहीसौतेलीमांनेलडक़ेकीबहनकाविवाहएककानेव्यक्तिकेसाथहीकरदिया।कानाव्यक्तिजबबारातलेकरवापसजारहाथा,तोबरातउसीरास्तेमेंगुजरी,जहांपरलडक़ीकाभाईअदृश्यहुआथा।बहननेउसस्थानपरडोलीरुकवाईऔरभाईकोयादकिया।भाईकोछोडक़रबहनससुरालजानेकोतैयारनहींथी।भाईकेवियोगमेंबहनने1किलोमीटरगांवकथाड़कीतरफजातेहुएडोलीसेछलांगलगादीऔरकुछदूरीकेबादवहअंतध्र्यानहोकरनीचेभाभड़केघासकेसाथपवित्रजलधाराकेरूपमेंप्रकटहुई।

बादमेंयहजलप्रवाहदेहिनदीकेरूपसेप्रसिद्धहुए।आजइसीनदीसेआसपासगांवमेंपेयजलकीआपूर्तिहोतीहै।भाईबहनद्वाराअनजानेमेंकीगईशिवपरिक्रमाकेआशीर्वादसेशिवलोककोप्राप्तहुए।भाई-बहनकिइसप्रेमगाथाकोहिमाचलप्रदेशस्कूलशिक्षाबोर्डद्वारा1970केदशकमेंआठवींकक्षाकीहिंदीपुस्तकपाठ्यक्रममेंसम्मिलितकियागयाथा।

बुरांसकेफुलोंसेगुलजाररहतीपच्छादक्षेत्रकीवादियां

सिरमौरजिलाकेपच्छादविधानसभाक्षेत्रसराहां,टिक्कर,क्वागधार,बागपशोग,पानवाऔरनैनाटिक्करक्षेत्रकेएकबड़ेभू-भागपरबुरासकानजारादेखपर्यटकघाटीकालुप्तउठातेहै।इनवादियोंमेंबुरासकेफुलमार्च,अप्रैलवमईमहीनेतकअपनाअद्वभुतसौंदर्यबिखेरतेहैं।

कैसेपहुंचेक्वागधार

देशकेविभिन्नहिस्सोंसेक्वागधारपहुंचनेवालेपर्यटकोंकेलिएसबसेनजदीककेरेलवेस्टेशनधर्मपुर,सोलनवकालकाहै।चंडीगढ़सेक्वागधारकीदूरी70किलोमीटरहै।क्वागधारकेसमीपसबसेनजदीककाएयरपोर्टशिमलावचंडीगढ़हैं।जबकिक्वागधारमेंहीपच्छादउपमंडलकासरकारीहैलीपेडभीबनाहै।नाहन-शिमलाराष्ट्रीयराजमार्गपरस्थितपानवासेमंदिरकीदूरीमात्रदोकिलोमीटरहै।

मंदिरतकसम्र्पकसडक़कानिर्माणकियागयाहै।पर्यटकोंवश्रद्धालुओंकेठहरनेकेलिएसराहांवनैनाटिक्करमेंधर्मशालाएं,हिमाचलटूरिज्मकेहोटल,सरायं,अन्यनिजीहोटलवहिमाचलसरकारकेविश्रामगृहउपलब्धहै।

औषधीयगुणोंसेभरपूरकाफलपायाजाताहैक्वागधारक्षेत्रमें

मध्यहिमालयपर्वतश्रृखंलाओंकेशिवालिकक्षेत्रकेजंगलोंमेंपाएजानेवालेकाफलक्वागधारक्षेत्रमेंभारीमात्रापायेजातेहै।काफलऔषधीगुणोंसेभरपूरपेट,खूनवहृदयसेसंबंधितकईबीमारियोंकीरोकथाममेंउपयोगीपायाजाताहै।चखनेमेंकाफलकास्वादखट्टा-मीठाहोता।प्रदेशमेंपाएजानेवालेकाफलकावैज्ञानिकनाम‘मेरिकाएस्कूलेंटा’है।काफलकापेड़आमतौरपरबानऔरबुरासकेजंगलोंमेंपायाजाताहै।काफलकेपेड़कीऔसतनऊंचाई20से40फीटहोतीहै।