मुजफ्फरपुर,अंकितकुमार।शिक्षाकेबिनासमाजकाविकाससंभवनहींहै।यहलोगोंकोसम्मानपूर्वकआजीविकादिलानेकेसाथहीबेहतरसमाजकेनिर्माणमेंसहायकहोताहै।बाबूलंगटङ्क्षसहनेकरीब122वर्षपूर्वअपनीदूरदर्शीसोचसेमुजफ्फरपुरमेंएलएसकालेजमेंकीस्थापनाकीथी।मूलरूपसेवैशालीजिलेकेधरहरागांवमेंकिसानपरिवारमेंजन्मेबाबूलंगटङ्क्षसहनेस्वयंप्राथमिकशिक्षापाईपरउन्होंनेउच्चशिक्षाकेक्षेत्रमेंकईऐसेकार्यकिएजोआजभीसमाजकेसामनेमिसालप्रस्तुतकररहाहै।लंगटसिंहकाजन्मसन10अक्टूबर1850मेंहुआथा।गांवमेंकोईस्कूलनहींहोनेकीवजहसेउन्होंनेप्राथमिकविद्यालयतककीशिक्षाप्राप्तकीऔर16वर्षमेंहींउनकीशादीहोगई।लंगटसिंहकेपरिवारसामान्यथा।ऐसेमेंआजीविकाकेलिएवेसमस्तीपुरआगए।हाजीपुरनिवासीअधिवक्तागंगोत्रीप्रसादसिंहकहतेहैंकिसमस्तीपुरदरभंगारेल-लाइनकेबगलमेंउन्हेंटेलीफोनलाइनमेंलाइनमैनकाकाममिलगया।उसीसमयउनकीमुलाकातअंग्रेजअभियंताग्रीयरविल्सनसेहुई।कालांतरमेंलंगटसिंहकीलगनशीलताविल्सनदंपतीप्रभावितहुए।उनसेलंगटसिंहनेअंग्रेजीलिखना-बोलनासीखा।रेललाइननिर्माणमेंठीकेदारीकरनेलगे।

बनारसकीमहासभामेंदिखाईदिलेरीतोदंगरहगएराजा-महाराजा

1895मेंबनारसमेंभूमिहारब्राह्मणमहासभामेंलंगटसिंहपहलीबारहिस्सालेनेगए।उसकीअध्यक्षताकाशीनरेशकररहेथे।इसमेंकईभूमिहारजमींदारसम्मलितहुए।महासभामेंमालवीयजीकेप्रयाससेबनारसमेंहिंदूविश्वविद्यालयखोलनेकाप्रस्तावपासहुआ।सभीनेचंदादेनेकीबातकही।इसीदौरानलंगटसिंहनेएकलाखटकाचंदाकेरूपमेंदियातोसभीचकितहोगए।वहींलंगटसिंहकोमुजफ्फरपुरमेंकालेजखोलनेकाविचारआया।जनवरी1899मेंभूमिहारब्राह्मणसभाकामुजफ्फरपुरमेंअधिवेशनहुआ।इसमेंदेशभरकेविद्वानऔरजमींदारआए।महासभामेंलंगटसिंहद्वारामुजफ्फरपुरमेंडिग्रीकालेजखोलनेकेप्रस्तावपासकियागया।लंगटङ्क्षसहनेस्कूलऔरकालेजखोलनेकेलिएसरैयागंजमें13एकड़जमीनदिया।तीनजुलाई1899कोसरैयागंजमेंउसीजमीनपरभूमिहारब्राह्मणकालेजिएटस्कूलऔरभूमिहारब्राह्मणकालेजकीनींवरखीगई।बादमेंदामुचककेपासजमीनकीखरीदारीहुईजहांवर्तमानमेंएलएसकालेजहै।

प्राचार्यबोले-विरासतकोबचानेकेलिएकररहेहरसंभवप्रयास

एलएसकालेजकेप्राचार्यडा.ओपीरायनेकहाकिबाबूलंगटसिंहमहामानवथे।उन्होंनेउच्चशिक्षाकीदिशामेंजोअलखजगाईउसेकभीभूलानहींजासकता।उनकेद्वारास्थापितएलएसकालेजआजभीबिहारविविकेप्रीमियरकालेजोंमेंअव्वलहै।इकलौतेइसीकालेजकोनैकसेग्रेडएप्राप्तहै।इसकीऐतिहासिकताकोकायमरखनेकीदिशामेंहरसंभवकार्यहोरहेहैं।