जागरणसंवाददाता,हापुड़:

युद्धकेमैदानमेंजीतकेलिएगोलियोंकीबौछारहोरहीथी।जमीनसेलेकरआसमानतकभारत-पाकिस्तानकेसैनिकवर्चस्वकीलड़ाईलड़रहेथे।भूख-प्यासेसहकरभारतीयसैनिकमातृभूमिकीरक्षाकेलिएहरकदमआगेबढ़रहेथे,लेकिनसिपाहीराजबीरसिंहभलीभांतिजानतेथेकिभूखेपेटलड़ाईनहींलड़ीजासकती।सैनिकोंकोखानापहुंचानेकेलिएजानकोदांवपरलगाकरवहयुद्धस्थलपरपहुंचगए।इसदौरानदुश्मनोंनेआसमानसेहमलाकरदिया।राजबीरबुरीतरहजख्मीहोगए,जिस्मसेलहूबहतारहापरउनकाजुनूनकमनहींहुआ।रेंगते-रेंगतेवहसाथियोंकेपासपहुंचेऔरउन्हेंभोजनदिया।घायलअवस्थामेंउन्हेंजम्मूकेएकअस्पतालमेंभर्तीकरायागया।जहांवहवीरगतिकोप्राप्तहोगए।

पिलखुवाक्षेत्रकेगांवसिखेड़ानिवासीराजबीरसिंहचारभाइयोंमेंदूसरेनंबरपरथे।सबसेबड़ेभाईकृपालसिंह,तीसरेनंबरपरधर्मसिंहऔरछोटाबलबीरसिंहहैं।बलिदानीकीशादीसत्यवतीसेहुईथी।शादीकेआठसालबादहीवहमांभारतीकेलिएकुर्बानहोगए।उनकेभाईधर्मवीरसिंहबतातेहैंकिबलिदानीराजवीरसिंहकीआर्मीसप्लाईकोर(सेनाकोदवा,खानापहुंचनेवालीटीम)मेंतैनातीथी।

वर्ष1971मेंपाकिस्तान-भारतकेबीचयुद्धकेदौरानवह21पंजाबबटालियनमेंथे।17दिसंबरकीरातकोउन्हेंसूचनामिलीकिभाईराजबीरसिंहयुद्धमेंघायलहोगएहैं।उन्हेंजम्मूकेएकअस्पतालमेंभर्तीकरायागयाहै।18दिसंबरकीदोपहरसूचनाआईकिराजबीरसिंहवीरगतिकोप्राप्तहोगएहैं।उनकापार्थिवशरीरदिल्लीलायाजारहाहै।सूचनापरस्वजनदिल्लीपहुंचेथे।उससमयपार्थिवशरीरकोगांवलानेकीइजाजतनहींथी।इसलिएपार्थिवशरीरकादिल्लीमेंहीअंतिमसंस्कारकियागया।उनकेबलिदानकेकुछदिनबादउनकीपत्नीसत्यवतीकाभीनिधनहोगयाथा।वर्तमानमेंशहीदकापरिवारमेरठजनपदमेंरहताहै।ग्रामसिखेड़ामेंउनकेभाईधर्मवीरसिंहपरिवारसहितरहतेहैं।

गर्वसेचौड़ाहोजाताहैसीना-

वर्ष1971मेंशहीदहुएभारतमांकेसपूतआजभीस्वजनऔरदेशवासियोंकेदिलोंमेंबसतेहैं।राजबीरसिंहतीससालकेथे।जबउन्होंनेभारतमांकीरक्षाकरतेहुएअपनेप्राणोंकोन्योछावरकरदियाथा।उससमयउनकाबड़ाबेटाविजयकुमारमात्रपांचसालकाथाऔरदोनोंबेटियोंकीउम्रभीदोसेतीनसालकेबीचथी।शहीदकीपत्नीसत्यवतीनेबच्चोंकीपरवरिशकी।विजयकुमारआयकरविभागमेंतैनातरहे,लेकिनउनकीभीएकसड़कदुर्घटनामेंमौतहोगईथी।वर्तमानमेंविजयकुमारकीपत्नीलक्ष्मीदेवीऔरदोपुत्रयशीकुमारएवंतरूणमेरठमेंरहतेहैं।बेशक,उन्होंनेअपनेदादाकोनहींदेखा,लेकिनउनकीशौर्यगाथाकोसुनकरदोनोंपोतोंकासीनागर्वसेचौड़ाहोजाताहै।