समस्तीपुर,जासं।जिलामुख्यालयसेमहजदो-तीनकिलोमीटरउत्तर-पूर्वमेंमन्नीपुरगांवमेंसदियोंसेस्थापितहैसिद्धहस्तमांदुर्गाकामंदिर।जोमाईस्थानकेनामसेविख्यातहै।यहांकेबारेमेंमान्यताहैकिकोईभीव्यक्तिआजतकयहांसेखालीहाथनहीलौटाहै।सभीमन्नतेंपूर्णहुईहै।नवरात्रकेसमयखासकरसप्तमी,अष्टमीतथानवमीकोबड़ीसंख्यामेंमहिलाएंयहांखोईंछाभरनेपहुंचतीहै।साथहीनारियलफोड़करचढातीहै।मान्यताहैकिइससेउनकीसभीमनोकामनाएंपूर्णहोजातीहै।इसमंदिरकीख्यातिप्रदेशहीनहीबल्किअन्यप्रदेशोंमेंभीहै।यहीवजहहैकिश्रद्धालुओंकीआस्थाकोदेखकरपर्यटनविभागनेइसेपर्यटनस्थलघोषितकरनेवालेसूचीमेंरखाहुआहै।साथहीजल्दहीयहपर्यटनस्थलकेरुपमेंयहघोषितहोजाएगा।

लगभगडेढसौवर्षपूर्वहुईथीमाताकीपिंडीरूपमेंस्थापना

बतायाजाताहैकि19वींसदीमेंमन्नीपुरवइसकेआसपासकेकईगांवोंमेहैजामहामारीफैलगईथी।जिसमेंकाफीसंख्यामेंलोगोंकीजानेंचलीगईथी।चारोंतरफत्राहिमामकीस्थितिबनीहुईथी।उसीसमयमन्नीपुरनिवासीतपस्वीब्रह्मचारीसद्पुरुषश्रीश्रीरामखेलावनदासकोमातानेस्वप्नमेंदर्शनदेतेहुएपिंडीस्थापितकरपूजाअर्चनाकरनेकोकहा।स्व.दाससड़ककिनारेपूर्वाभिमुखमाताकीपिंडीस्थापितकरपूजाअर्चनाकरनेलगे।तत्पश्चातक्षेत्रकीस्थितिमेंतेजीसेसुधारहोनेलगा।स्थितिसामान्यहोगईतथाचारोतरफखुशियांलौटगई।

मातामंदिरकीस्थापना

मन्नीपुरसेसटेदौलतपुरनिवासीस्व.वासुदेवनारायणनेसन्1857ई.मेंरामखेलावनदासकाशिष्यत्वग्रहणकरमाताकेपिंडीकापूजाप्रारंभकिया।फिरसन्1936ईमेंएकश्रद्धालुसहएकमात्रमानसिकरूपसेविक्षिप्तपुत्रकीविधवामांस्थानीयनिवासीस्व.रामकिशुनसिंहकीपत्नीस्व.मायावतीदेवीअपनेमनकीशांतिएवंजीविकोपार्जनकेलिएप्रतिदिनमाताकीपिंडीकीपूजाकरतीवदिनभरवहांबैठतीथी।उन्होंनेअपना1कट्ठा18धुरजमीनदानकरनेकीबातवासुदेवनारायणसेकरतेहुएनिशुल्कअपनीजमीनवासुदेवनारायणकेनाममंदिरबनवानेकावादाकरातेहुएनिबंधितकरदिया।वासुदेवनारायणनेअपनेकोषसेएकछोटासामंदिरकानिर्माणकराकरकाशी,अयोध्यासेविद्वानब्राह्मणपुरोहितोंकोआमंत्रितकरउक्तपिंडीकोमंदिरमेंस्थापितकरायाफिरकुछमाहपश्चातमूर्तिकारोंसेमिट्टीसेबनीमाताकीप्रतिमूर्तिस्थापितकीगईजोप्रत्येकमलमासउपरांततीनवर्षोपरविसर्जितकरदीजातीथी।

2013मेंधार्मिकन्यासपरिषदकेहुआहवाले

मंदिरकीबढ़रहीप्रसिद्धितथाआयमेंबेतहाशावृद्धिकोदेखकरएकपूर्णतयासमर्पितमंदिरसमितिकीआवश्यकतापरस्व.वासुदेवकेउत्तराधिकारियोंनेबिहारराज्यधार्मिकन्यासपरिषदसेलिखितनिवेदनकिया।न्यासपरिषदकेतत्कालीनअध्यक्षआचार्यकिशोरकुणालवजिलेकेतत्कालीनपुलिसअधीक्षकवरुणकुमारसिन्हाकेसहयोगसेवर्ष2013केजूनमाहमेंयहप्रसिद्धमंदिरधार्मिकन्यासबोर्डपटनाकेनिबंधनसंख्या4254केतहतनिबंधितहोगया।जिसकेपदेनअध्यक्षअंचलाधिकारीकोबनातेहुएअवैवतनिकग्यारहसदस्योंकीनियुक्तिकीगई।फिर2016मेंस्थानीयप्रह्लादसिंहकेभूमिदानकरनेपरदोतल्लाभवनबनाकरमंदिरमेंमाताकीमूर्तिप्रतिस्थापितकीगईतथापरिसरमें51फीटकापंचमुखीहनुमानजीकीप्रतिमास्थापितकीगई।साथहीनवग्रहमूर्तिकीभीस्थापनाकीजारहीहै।

कहतेहैंपुजारी

मुख्यपुजारीविपिनकुमारझाकहतेहैकियहमंदिरमनोकामनापूरीकरनेकेलिएचर्चितहै।यहांआनेवालोंकीसभीश्रद्धालुओंकीमुरादेंपूरीहोतीहै।यहांमाथाटेकनेमात्रसेसारेकष्टदूरहोजातेहैंतथाअसीमशांतिमिलतीहै।आमदिनोंमेंभीयहांसैकड़ोंश्रद्धालुओंकीभीभीड़जुटतीहै।