खगड़िया।मांदुर्गामंदिरचौथमकीप्रसिद्धिदूर-दूरतकहै।यहांशारदीयनवरात्रमेंदूर-दूरसेश्रद्धालुपूजा-अर्चनाकोआतेहैं।स्थानीयलोगोंकेअनुसारयहांसेआजतककोईश्रद्धालुखालीहाथनहींलौटेहैं।जोभीभक्तसच्चेमनसेजोकुछमांगतेहैंउनकीमनोकामनाअवश्यपूरीहोतीहै।शारदीयनवरात्रशुरूहोतेहीयहांश्रद्धा,भक्तिऔरविश्वासकीत्रिवेणीप्रवाहितहोनेलगतीहै।प्रत्येकवर्षयहांभव्यमेलाकाआयोजनकियाजाताहै।इसबारयहांविशेषपूजनकीव्यवस्थाकीगईहै।

गंगाआरतीकेतर्जपरनवरात्रमेंप्रतिदिनभव्यआरतीकीव्यवस्थाकीगईहै।मंदिरकीव्यवस्थासेजुड़ेयुवराजशंभूनेबतायाकिबनारसकेपंडितोंद्वाराआरतीकीजाएगी।मंदिरकाइतिहास

चौथमस्टेटकेराजासुरेंद्रनारायण¨सहकोजबसंताननहींहुआ,तोउन्होंनेसरैयास्थितदुर्गास्थानमेंमांदुर्गाकीपूजा-अर्चनाकरसंतानप्राप्तिहेतुमन्नतमांगी।तत्पश्चातउन्होंनेवहांसेपानकराकर1942ई.मेंचौथममेंमांदुर्गाकीस्थापनाकी।स्थापनाकेतीनवर्षबादराजासुरेंद्रनारायण¨सहकोपुत्ररत्नकीप्राप्तिहुई।उनकेएकमात्रपुत्रराजामुरारीकीओरसेइसमंदिरकीदेखरेखकीजातीहै।खैर,तबसेलेकरआजतकयहांशारदीयनवरात्रमेंमांदुर्गाकीप्रतिमास्थापितकरधूम-धामसेपूजा-अर्चनाकीजातीहै।मंदिरकीवास्तुकला

दक्षिणमुखकीओरसाधारणछतदारमकानहै।चारोओरग्रिलसेघिराहुआहै।बांग्लापद्धतिकेअनुरूपप्रतिमाकानिर्माणरांकोगांवकेमूर्तिकारशंकरपंडितकेद्वाराकियाजाताहै।मांदुर्गासमेतलक्ष्मी,सरस्वतीकीप्रतिमास्थापितकीजातीहै।मेलाकाआकर्षण

राजामुरारीकेपुत्रयुवराजशंभूकेअनुसारइसबारपूजनकेदौरानगंगाआरतीकेतर्जपरभव्यआरतीकीव्यवस्थाकीगईहै।बेल्लूरमठ,बनारसकेश्यामबिहारीमिश्राएवंपूरीमठकेस्वामीओमप्रकाशजीमहाराजकेनेतृत्वमेंपंडितोंद्वाराविधि-विधानसेपूजा-अर्चनाकीजाएगी।जिसमेंज्योतिषाचार्यडॉ.अशोकझा,शुभमपाठक,विवेकतिवारीआदिभीभागलेंगे।वहींदशमीकेदिनप्रत्येकवर्षकीभांतिइसबारभीमहिषासुरबधकियाजाएगा।युवराजशंभूनेबतायाकिइसवर्षकुलबजटपांचलाखहै।========